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संघ कार्य में योगदान : प्रो. राजेन्द्र सिंह 'राज्जू भैया' की पुण्यतिथि पर विशेष समाचार तिथि: 14 जुलाई (पुण्यतिथि)

Ashwani Kumar Sinha

Mon, Jul 14, 2025

📰 प्रो. राजेन्द्र सिंह 'राज्जू भैया' की पुण्यतिथि पर विशेष समाचार
तिथि: 14 जुलाई (पुण्यतिथि)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक प्रोफेसर राजेन्द्र सिंह 'राज्जू भैया' की पुण्यतिथि (14 जुलाई) पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके जीवन के प्रेरणादायक पहलुओं को स्मरण करना राष्ट्र सेवकों का कर्तव्य है।

👤 संक्षिप्त जीवन परिचय:

  • जन्म: 29 जनवरी 1922, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश

  • शिक्षा: इलाहाबाद विश्वविद्यालय से B.Sc., M.Sc., Ph.D.

  • विषय: भौतिकी (Physics), विशेषता: परमाणु भौतिकी (Nuclear Physics)

  • उन्हें नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक सी.वी. रमण द्वारा “असाधारण प्रतिभा” कहा गया था।

  • उन्होंने 1966 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पद से त्यागपत्र देकर संघ कार्य के लिए पूर्णकालिक समर्पण किया।

🧭 संघ कार्य में योगदान:

  • वर्ष 1942 में 'भारत छोड़ो आंदोलन' के समय से संघ के सक्रिय स्वयंसेवक रहे।

  • उत्तर प्रदेश के प्रांत प्रचारक, फिर सरकार्यवाह और अंत में 1994 में सरसंघचालक बने।

  • वे संघ के चतुर्थ सरसंघचालक रहे (1994–2000)।

  • स्वास्थ्य कारणों से 2000 में उन्होंने यह दायित्व प्रो. सुदर्शन जी को सौंप दिया।

📚 विशेष उपलब्धियाँ व योगदान:

  1. वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अध्यात्मिक मूल्यों का संतुलन।

  2. 1975 के आपातकाल में लोकतंत्र और मानवाधिकारों की रक्षा हेतु सक्रिय भूमिका।

  3. सामाजिक समरसता, ग्रामीण विकास, स्वदेशी जागरण व राष्ट्र निर्माण के लिए अनेक योजनाओं की शुरुआत।

  4. उन्होंने संघ में सहकारिता, सहजता और संवाद की परंपरा को बल दिया।

  5. उनके नेतृत्व में संघ का राष्ट्रव्यापी विस्तार और सामाजिक प्रभाव और अधिक बढ़ा।

🌾 ग्रामीण व सामाजिक योजनाएँ

  • 1995 में उन्होंने घोषणाएँ कीं:

    • भूखमुक्त गाँव

    • रोगमुक्त समाज

    • साक्षर व आत्मनिर्भर भारत

  • आज भी इन योजनाओं की प्रेरणा से अनेक प्रकल्प संचालित हो रहे हैं।

🌟 व्यक्तित्व की विशेषताएँ:

  • अत्यंत सरल, विनम्र, आत्मीय और परिश्रमी व्यक्तित्व।

  • वे कहते थे: “हर व्यक्ति मूलतः अच्छा होता है, उसमें अच्छाई खोजने का अभ्यास करना चाहिए।”

  • विज्ञान, विचार और व्यवहार में एक दुर्लभ संतुलन उनके व्यक्तित्व की विशेष पहचान थी।

🙏 निधन:

  • 14 जुलाई 2003 को पुणे में उनका देहावसान हुआ।

  • यह दिन आज भी संघ कार्यकर्ताओं के लिए श्रद्धा, स्मृति और प्रेरणा का दिवस है।

📌 श्रद्धांजलि:

प्रो. राजेन्द्र सिंह 'राज्जू भैया' का जीवन राष्ट्र को समर्पित, तपस्वी और विचारशील कार्यकर्ता का आदर्श उदाहरण है। उनके विचार और कार्य आज भी संघ के प्रत्येक कार्यकर्ता को राष्ट्रसेवा की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

✍️ संकलन एवं प्रस्तुति:
(यह लेख सत्यापित ऐतिहासिक स्रोतों एवं संघ साहित्य पर आधारित है।)

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