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सुप्रीम कोर्ट में उपभोक्ताओं के लिए : राइट टू नो’ पर PIL – सभी दुकानदार और विक्रेता को पहचान व संपर्क विवरण अनिवार्य

Ashwani Kumar Sinha

Sat, Jul 26, 2025

सुप्रीम कोर्ट में उपभोक्ताओं के लिए ‘राइट टू नो’ पर PIL – सभी दुकानदार और विक्रेता को पहचान व संपर्क विवरण अनिवार्य

नई दिल्ली, 21 जुलाई 2025 — सुप्रीम कोर्ट ने अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर एक सार्वजनिक हित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किया है। याचिका में मांग की गई है कि देश के सभी दुकानदारों, ठेलेवालों, ट्रेडर्स, वितरकों, ऑनलाइन व ऑफलाइन विक्रेताओं को अपनी पहचान और संपर्क विवरण स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य किया जाए, ताकि उपभोक्ता किसी भी समस्या पर सीधे कार्रवाई कर सकें।

याचिका की मुख्य बातें

  • उपभोक्ता को “Right to Know” (जानने का अधिकार) मिले।

  • हर विक्रेता अपना नाम, पता, पंजीकरण संख्या और मोबाइल नंबर दुकान या वेबसाइट पर बड़े अक्षरों में प्रदर्शित करे।

  • पहचान न दिखाने वालों पर कार्रवाई हो सके।

  • सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

याचिका का उद्देश्य

  • उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी, नकली या घटिया सामान मिलने पर सीधे शिकायत दर्ज करने की सुविधा देना।

  • विक्रेताओं की जवाबदेही बढ़ाना और गुमनाम व्यापार को रोकना।

कानूनी आधार

  • याचिका उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत दायर।

  • मामला ASHWINI KUMAR UPADHYAY v. UNION OF INDIA & ORS. (W.P.(C) No. 667/2025) के नाम से पंजीकृत।

  • सुनवाई 21 जुलाई 2025 को हुई, अगली सुनवाई चार सप्ताह में होगी।

  • बेंच: जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता।

उपभोक्ताओं पर प्रभाव

  • दुकानदार की पूरी जानकारी मिलने से पारदर्शिता बढ़ेगी।

  • उपभोक्ता को शिकायत दर्ज करने और कार्रवाई में आसानी होगी।

  • धोखाधड़ी और नकली विक्रेताओं की पहचान कर कानूनी कदम उठाना सरल होगा।

यदि सुप्रीम कोर्ट यह आदेश पारित करता है, तो हर ग्राहक को सामान खरीदते समय बनाने वाले और बेचने वाले की पूरी जानकारी उपलब्ध होगी, जिससे वह अपने अधिकार का उपयोग कर सकेगा और आवश्यक कार्रवाई कर पाएगा।

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