ऋतु हमें प्रकृति के अनुरूप जीवन जीने की प्रेरणा देती है। : ज्येष्ठ मास में खान-पान और आयुर्वेदिक जीवनशैली से स्वास्थ्य रक्षा
Ashwani Kumar Sinha
Thu, May 15, 2025
ज्येष्ठ मास में खान-पान और आयुर्वेदिक जीवनशैली से स्वास्थ्य रक्षा
1. परिचय:
ज्येष्ठ मास हिन्दू पंचांग के अनुसार ग्रीष्म ऋतु का चरम समय होता है, जब सूर्य उत्तरायण में उच्चतम तापमान पर होता है। इस समय शरीर में पित्त दोष और गर्मी (अग्नि तत्त्व) का प्रभाव अत्यधिक बढ़ता है। अतः आयुर्वेद में इस मास को संतुलित आहार-विहार एवं शीतल गुणों से युक्त जीवनशैली अपनाने की अत्यधिक सलाह दी जाती है।
2. शरीर की स्थिति (आयुर्वेदिक दृष्टि से - दोषों का संतुलन):
पित्त दोष: अत्यधिक सक्रिय – गर्मी, जलन, अपच, चक्कर।
वात दोष: असंतुलित – सूखापन, चिड़चिड़ापन।
कफ दोष: घटता है – शरीर में रूखापन।
3. खान-पान:
क्या खाएं (शीतल और पौष्टिक चीजें):
सत्तू (चने का) – शीतलता व एनर्जी देने वाला
छाछ / मट्ठा – पाचन सुधारक, ठंडकदायक
गुलकंद – पित्त शांत करता है
तरबूज, खीरा, खरबूजा – हाइड्रेशन बढ़ाते हैं
नींबू-पानी, बेल शरबत, आमपना, फालसा शरबत
मिश्री + धनिया + सौंफ का पानी
क्या न खाएं:
तली-भुनी, मसालेदार चीजें
गरम चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक
अधिक नमक या लाल मिर्च
बासी या देर से बना भोजन
4. जल सेवन:
सुबह गुनगुना जल – पाचन हेतु
मिट्टी के घड़े का पानी – प्राकृतिक शीतलता
हर्बल पानी – धनिया, सौंफ, तुलसी युक्त
5. घरेलू आयुर्वेदिक नुस्खे:
शीतल चूर्ण – गर्मी और जलन से राहत
गुलकंद + शहद – थकान और गर्मी से बचाव
आंवला चूर्ण + मिश्री – पाचन और त्वचा लाभ
त्रिफला चूर्ण रात में – शरीर की सफाई
6. दिनचर्या (Dinacharya):
ब्रह्ममुहूर्त में जागरण
हल्के गर्म जल या नीम जल से स्नान
दोपहर में अल्प विश्राम (Power Nap)
संध्या ध्यान और पदयात्रा
7. योग और प्राणायाम:
8. आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से:
गर्मी में इलेक्ट्रोलाइट और हाइड्रेशन आवश्यक
सत्तू को प्राकृतिक प्रोटीन और ऊर्जा स्रोत माना गया है
शरबत और मट्ठा पाचन तंत्र को ठंडक देते हैं
9. सावधानियाँ:
दोपहर की धूप में खाली पेट न जाएं
फ्रिज का अधिक ठंडा पानी न पिएं
अधिक देर भूखे न रहें
दिनचर्या में ठंडे जल से स्नान अवश्य करें
10. निष्कर्ष:
ज्येष्ठ मास में यदि व्यक्ति आयुर्वेदिक दिनचर्या और शीतल खानपान का पालन करे, तो वह न केवल गर्मी से सुरक्षा पा सकता है बल्कि दीर्घकालिक स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ बना सकता है। यह ऋतु हमें प्रकृति के अनुरूप जीवन जीने की प्रेरणा देती है।
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