: सुप्रीम कोर्ट का अहम निर्णय आदेश 41नियम 17 सीपीसी
Wed, Dec 6, 2023
सुप्रीमकोर्ट का अहम निर्णय आदेश 41 नियम 17 सीपीसी – यदि अपीलकर्ता उपस्थित होने में विफल रहता है तो अपील गुण-दोष के आधार पर खारिज नहीं की जा सकती; अभियोजन न चलाने पर बर्खास्त किया जाए*
दिल्ली से वेदप्रकाश रस्तोगी के साथ भोपाल से यावर खान एडवोकेट की रपट
आदेश 41 नियम 17 सीपीसी – यदि अपीलकर्ता उपस्थित होने में विफल रहता है तो अपील गुण-दोष के आधार पर खारिज नहीं की जा सकती; अभियोजन न चलाने पर बर्खास्त किया जाए : सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि अपील सुनवाई के लिए बुलाए जाने पर अपीलकर्ता उपस्थित नहीं होता है तो इसे गैर-अभियोजन पक्ष के आधार पर खारिज किया जा सकता है, न कि योग्यता के आधार पर। ये निष्कर्ष सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश एक्सएलआई नियम 17 में दिए गए स्पष्टीकरण के संदर्भ में है। यदि सुनवाई के लिए निर्धारित दिन पर अपीलकर्ता उपस्थित नहीं होता है तो यह आदेश न्यायालय को अपील खारिज करने का अधिकार देता है।
इसकी व्याख्या इस प्रकार है:
“स्पष्टीकरण- इस उप-नियम में किसी भी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि यह न्यायालय को गुण-दोष के आधार पर अपील खारिज करने का अधिकार देता है।”
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने इसकी व्याख्या करते हुए कहा,
“स्पष्टीकरण में स्पष्ट रूप से कहा गया कि यदि अपील सुनवाई के लिए बुलाए जाने पर अपीलकर्ता उपस्थित नहीं होता है तो इसे केवल गैर-अभियोजन पक्ष के कारण खारिज किया जा सकता है, न कि योग्यता के आधार पर।”मौजूदा मामला वर्तमान अपीलकर्ताओं और प्रतिवादियों के बीच संपत्ति विवाद से संबंधित है। विवाद के बाद अपीलकर्ताओं द्वारा मुकदमा दायर किया गया, जिसमें उत्तरदाताओं के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा का दावा किया गया। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। नतीजतन, अपीलकर्ताओं ने दूसरी अपील में कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख किया।
हालांकि, जिस तारीख को अपील सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई, बहस करने वाले सीनियर वकील के जूनियर ने अदालत को सूचित किया कि सीनियर वकील के चचेरे भाई की मृत्यु हो गई। इस प्रकार, अपीलकर्ताओं की ओर से कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।
इसके बावजूद, हाईकोर्ट ने गुण-दोष के आधार पर अपील खारिज कर दी और पाया कि इस पर विचार करने का कोई आधार नहीं है। इससे व्यथित होकर अपीलकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
एक ओर अपीलकर्ता ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट गैर-अभियोजन के कारण अपील खारिज कर सकता है, लेकिन योग्यता के आधार पर नहीं। इसके अलावा, यह भी दलील दी गई कि मामले को गुण-दोष के आधार पर हाईकोर्ट द्वारा पुनर्विचार के लिए भेजा जा सकता है।
जबकि दूसरी ओर, प्रतिवादी पक्ष ने तर्क दिया कि अपील में कोई योग्यता नहीं है और अपीलकर्ताओं की ओर से उच्च न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने में लगातार विफलता के कारण आक्षेपित आदेश पारित किया गया।
दोनों पक्षकारों को सुनने के बाद न्यायालय ने उपरोक्त टिप्पणियां कीं और माना कि योग्यता के आधार पर अपील खारिज करना आदेश एक्सएलआई नियम 17 के विपरीत है। उसी के मद्देनजर, न्यायालय ने अपील की अनुमति दी और हाईकोर्ट के साथ इसे बहाल कर दिया।
केस टाइटल: बेनी डिसूजा बनाम मेल्विन डिसूजा, डायरी नंबर- 42876 – 2023
: बीमा पॉलिसी लेते समय सच बताएं न छिपाएं राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग
Tue, Nov 14, 2023
लोग अक्सर अपने परिवार के अच्छे भविष्य के लिए महंगी से महंगी जीवन बीमा पॉलिसी लेते हैं, ताकि उनके ना रहने पर परिवार परेशान न हो।
लेकिन इसमें छोटी सी लापरवाही आपके सपने पर पानी फेर सकती है
। चेन्नई में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को नॉमिनी बनाते हुए 2 करोड़ की नौ जीवन बीमा पॉलिसी ली।
लेकिन, उसने स्मोकिंग का जिक्र बीमा पॉलिसी में नहीं किया।
पॉलिसी लेने वाले की जब असमय मौत हो गई तो कंपनी ने क्लेम देने से इनकार कर दिया।
राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के जस्टिस अपशाही की पीठ ने कंपनी के फैसले को सही ठहराया। उन्होंने कहा की
पॉलिसी लेते समय बीमा कंपनी को हर छोटी बात का जिक्र करना जरूरी है ।
छिपाते हैं तो
वह पॉलिसी धारक और बीमा कंपनी के बीच हुए कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन माना जाएगा।
यह है मामला: दो बातें छिपाई थी
चेन्नई के के ललित जैन ने 20 अप्रैल से 20 जून 2009 के बीच दो करोड़ की 9 बीमा पॉलिसी ली। ललित ने मेडिकल रिपोर्ट में 15 साल पहले हुई सर्जरी का जिक्र किया,
लेकिन यह नहीं बताया कि वह सिगरेट पीते हैं और कभी-कभार शराब भी हो जाती है ।
पॉलिसी लेने के 5-6 महीने बाद ललित की हार्ट अटैक से मौत हो गई कंपनी ने जांच कराई तो पता चला कि वे सिगरेट शराब पीते थे।
: सीनियर बनने के लिए प्रदेश भर के 19 वकीलों ने किया आवेदन
Sat, Nov 11, 2023
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में आवेदनों की स्कूटी के बाद होंगे साक्षात्कार। पिछले दिनों हाई कोर्ट द्वारा सीनियर एडवोकेट नियुक्त किए जाने को लेकर आवेदन आमंत्रित किए गए थे। वकीलों से प्राप्त आवेदनों का हाई कोर्ट द्वारा स्कूटनी की जाएगी। इसके बाद वकीलों के साक्षात्कार भी होंगे, वकीलों को सीनियर बनने के लिए अंक हासिल करना होगा, साक्षात्कार प्रक्रिया पूरी होने के बाद हाई कोर्ट द्वारा सूची जारी की जाएगी।
स्कूटनी में ही कई वकीलों के आवेदन निरस्त हो जाते हैं, साक्षात्कार में सीनियर बनने लायक नंबर हासिल करना होता हैं। वकीलों का कहना है कि सीनियर एडवोकेट के लिए इतने कड़े मापदंड कर दिए गए हैं कि वकील उसके लिए क्वालीफाई ही नहीं कर पाते हैं।