यह शरीर और मन दोनों का व्यायाम है। : मुर्गा आसन: परंपरा से स्वास्थ्य तक का सफर
Ashwani Kumar Sinha
Sat, Jul 5, 2025
📍 विद्यार्थियों से लेकर बड़ों तक—“मुर्गा आसन” बना स्वास्थ्य और मानसिक विकास का सरल उपाय
(विशेष रिपोर्ट)
भोपाल। वर्तमान समय में जहाँ बच्चे स्क्रीन पर अधिक समय बिता रहे हैं और बड़े लोग भी मानसिक तनाव, पीठदर्द व मोटापे जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, ऐसे में एक बेहद सरल, पारंपरिक लेकिन उपेक्षित योग क्रिया – “मुर्गा आसन” – पुनः चर्चा में है। यह केवल बच्चों के लिए ही नहीं, बड़े-बुज़ुर्गों के लिए भी लाभकारी साबित हो रहा है।
🔶 मुर्गा आसन: परंपरा से स्वास्थ्य तक का सफर
मुर्गा आसन (Murga Asan), जिसे पहले दंड के रूप में जाना जाता था, आज स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा दिमागी एकाग्रता, शरीर की लचीलापन, मोटापे पर नियंत्रण, तथा तनाव निवारण के लिए एक उपयोगी व्यायाम माना जा रहा है।
इसमें व्यक्ति अपने कान पकड़कर घुटनों के बल बैठता है — जो देखने में आसान लेकिन असरदार मुद्रा है।
🔷 विद्यार्थियों के लिए फायदे:
📘 एकाग्रता में वृद्धि: दिमाग को ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ने से स्मरण शक्ति और फोकस बेहतर होता है।
📚 पढ़ाई में मन लगना: ध्यान भटकने की प्रवृत्ति कम होती है।
💪 शारीरिक मजबूती: जांघों, पिंडलियों और रीढ़ की हड्डी को ताकत मिलती है।
😌 तनाव नियंत्रण: गुस्सा, चिढ़ और चंचलता में सुधार होता है।
🔷 बड़ों के लिए विशेष लाभ:
🧠 डिप्रेशन व चिंता में राहत: यह आसन मानसिक तनाव को नियंत्रित करता है।
🦵 घुटनों और मांसपेशियों को मजबूती: स्क्वाट जैसी मुद्रा हड्डियों व टांगों के लिए उपयोगी है।
💡 मेमोरी व सोचने की शक्ति में सुधार: नियमित अभ्यास से दिमागी थकान कम होती है।
❤️ हृदय स्वास्थ्य: यह आसन रक्त संचार को बेहतर बनाता है जिससे हृदय को लाभ मिलता है।
🔸 योग विशेषज्ञों की राय:
योगाचार्य डॉ. अनामिका शर्मा के अनुसार –
“मुर्गा आसन केवल दंड नहीं, बल्कि एक सशक्त योग मुद्रा है। इसे बच्चे हों या 60 साल के व्यक्ति, सभी बिना किसी उपकरण के कर सकते हैं। यह शरीर और मन दोनों का व्यायाम है।”
🔶 कैसे करें मुर्गा आसन (सरल विधि):
सीधे खड़े हों और दोनों हाथों से विपरीत कान पकड़ें।
अब घुटनों को मोड़ते हुए धीरे-धीरे नीचे बैठें।
पीठ सीधी रखें और इसी मुद्रा में 30 सेकंड से 2 मिनट तक रहें।
धीरे-धीरे खड़े हो जाएं और 3-5 बार दोहराएं।
⚠️ सावधानी:
घुटनों की पुरानी बीमारी हो तो डॉक्टर की सलाह लें।
बहुत मोटे लोग शुरुआत में दीवार या सहारे से करें।
🟢 निष्कर्ष:
मुर्गा आसन अब केवल एक बाल्यकाल की याद नहीं, बल्कि आधुनिक समय में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए एक असरदार उपाय बन चुका है। विद्यालयों, योग शिविरों, और यहां तक कि कार्यस्थलों पर भी इसे दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।
यह एक ऐसा अभ्यास है जिसमें न तो कोई खर्च है, न ही कोई साइड इफेक्ट — केवल फायदा ही फायदा है।
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