: ऋतुओ और स्वास्थ्य का तालमेल...
Sat, Oct 14, 2023
*ऋतुओं और स्वास्थ्य का तालमेल...*
ग्रीष्म ऋतु में दुर्बल हुआ शरीर वर्षा ऋतु में धीरे-धीरे बल प्राप्त करने लगता है।
आद्र वातावरण जठराग्नि को मंद करता है।
वर्षा ऋतु में वात-पित्त जनित व अजिर्रणजन्य रोगों का प्रादुर्भाव होता है।
अत: जठराग्नि प्रदीप्त करनेवाला वात-पित्तशामक आहार लेना चाहिए।*हितकर आहार :*
इस ऋतु में जठराग्नि प्रदीप्त करनेवाले अदरक, लहसुन, नींबू, पुदीना, हरा धनिया, सोंठ, अजवायन, मेथी, जीरा, हींग, काली मिर्च, पीपरामूल का प्रयोग करें।
जों, खीरा, लौकी, गिल्की, पेठा, तोरई, आम, जामुन, पपीता, सूरन सेवनीय हैं।
श्रावण मास में दूध व हरी सब्जियाँ न खायें।
वर्षा ऋतु में दही पूरणत: निषिद्ध है।
ताजी छाछ में काली मिर्च, सेंधा, जीरा, धनिया, पुदीना डालकर ले सकते हैं।
उपवास और लघु भोजन हितकारी है।
रात को देर से भोजन न करे।*अहितकर आहार :*
देर से पचनेवाले, भारी, तले, तीखे पदार्थ न लें।
जलेबी, बिस्कुट, डबलरोटी आदि मैदे की चीजे, बेकरी की चीजे, उड़द, अंकुरित अनाज, ठंडे पेय पदार्थ व आइसक्रीम के सेवन से बचे।
वर्षा ऋतु में दही पूर्णतः निषिध्द हैं।
श्रावण मास में दूध व हरी सब्जियाँ वर्जित हैं।*हितकर विहार :*
आश्रमनिर्मित धूप, हवन से वातावरण को शुद्ध व गों-सेवा फिनायल या गोमूत्र से घर को साफ करें।
तुलसी के पोंधे लगायें।
उबटन से स्नान, तेल की मालिश, हलका व्यायाम, स्वच्छ व हलके वस्त्र पहनना हितकारी हैं।
वातावरण में नमी और आर्द्रता के कारण उत्पन्न कीटाणुओं से सुरक्षा हेतु अश्रामनिर्मित धूप व हवन से वातावरण को शुद्ध तथा गौसेवा फिनायल या गोमुत्र से घर को स्वच्छ रखे।
घर के आसपास पानी इकठ्ठा न होने दे।
मच्छरों से सुरक्षा के लिए घर में गेंदे के पौधों के गमले अथवा गेंदे के फुल रखे और नीम के पत्ते, गोबर के कंड़े व गूगल आदि का धुआँ करे।*अपथ्य विहार :*
बारिश में न भींगे।
भीगे कपड़े पहनकर न रखें।
रात्रि-जागरण, दिन में शयन, खुले में शयन, अति परिश्रम एवं अति व्यायाम वर्जित है।